पुसौर के तुरंगा में गरीब किसान के बेटे को है दुर्लभ बीमारी, सिर्फ अमेरिका में ही दवा व इलाज है संभव, चाहिये 22.50 करोड़ का एक इंजेक्शन

रायगढ़। रायगढ़ जिले के विकासखंड पुसौर के ग्राम पंचायत तुरंगा के एक मध्यम वर्गीय किसान नरेन्द्र नायक एवं पद्मनी नायक के घर के चिराग 14 माह के मासूम छयांक को एक दुर्लभ बीमारी ने जकड़ लिया है जिसका इलाज भारत देश में ही संभव ही नहीं है और न ही इसकी दवाईयां ही वहां उपलब्ध है । इस बीमारी मासूम को उबारने व उसकी जिन्दगी बचाने के लिए जोलगेसिया इंजेक्शन चाहिये जिसे स्विटजरलैंड की नोवाटिस कंपनी ही बनाती है और उसे यूएसए में बेचता है मगर इसमें भी दिक्कत यह आ रही है कि इस इंजेक्शन की एक डोज की कीमत भारत मंगवाने पर टैक्स मिलाकर करीब 22.50 करोड़ रुपये पड़ेगी।

रायगढ़ सांसद श्रीमती गोमती साय को जब तुरंगा के किसान नरेंद्र नायक के पुत्र 14 माह के छयांक के बीमारी की जानकारी हुई तो उन्होंने माननीय नरेन्द्र मोदी जी प्रधानमंत्री भारत सरकार नई दिल्ली को एस.एम.ए. टाइप वन ( स्पाईनल मस्क्यूलर एथापी ) जैसी दुर्लभ गंभीर बीमारी से ग्रसीत 14 माह के बच्ची के ईलाज हेतु विशेष चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था के विषय को अंकित करते हुए पत्र लिखा कि मेरे लोकसभा क्षेत्र रायगढ़ अन्तर्ग वि.ख. पुसौर के ग्राम पंचायत तुरंगा निवासी मध्यम वर्गीय किसान नरेन्द्र नायक के 14 माह के मासुम छायांक को एस.एम.ए. टाइप वन ( स्पाईनल मस्क्यूलर एथापी ) जैसी दुर्लभ गंभीर बीमारी से ग्रसीत है जिसका ईलाज भारत में संभव नहीं है और ना ही इसकी दवाईयां उपलब्ध है । इस बीमारी से उक्त मासुम की जिन्दगी बचाने के लिए जो जोलगेसिया इंजेक्शन चाहिए जिसे स्वीटजरलेण्ड की नोवाटिस कम्पनी ही बनाती है उक्त इंजेक्सन के अभाव में बच्चे का ईलाज संभव नही हो पा रहा है । यह बताया गया है कि इस इंजेक्शन की एक डोज की कीमत भारत मगवाने पर टेक्स मिलाकर करीब 22.5 करोड़ रूपये पड़ेगी जो गरीब किसान परिवार के लिए संभवन नही है । अतः एस.एम.ए. टाइप वन ( स्पाईनल मस्क्यूलर एथापी ) जैसी दुर्लभ गंभीर बीमारी से ग्रसीत 14 माह के बच्ची के ईलाज हेतु विशेष चिकित्सकीय सुविधा के तहत् जोलगेंसिया इंजेक्शन उपलब्ध कराकर उक्त बच्ची के ईलाज की करवाने की कृपा करें।

देश में मेडिकल साइंस ने भले ही काफी तरक्की कर ली है मगर आज भी कई ऐसी जटिल बीमारियां हैं जिनका इलाज न हमारे पास है और न ही दवाईयां उपलब्ध है । एसएमए टाइप वन अर्थात् स्पाईनल मस्क्यूलर एथापी भी इन्हीं दुर्लभ बीमारियों में शामिल है जिसका इलाज भारत में संभव नहीं है और इसके इलाज के लिए करोड़ों में मिलने वाली इंजेक्शन सिर्फ यूएसए में है जहा इसके एक डोज की कीमत 16 करोड़ है । छत्तीसगढ़ में भी इस बीमारी के कई केस सामने आ चुके हैं और अब रायगढ़ जिले के पुसौर ब्लाक अंतर्गत तुरंगा गांव में इस दुर्लभ बीमारी से एक मासूम बच्चे के ग्रसित होने की जानकारी सामने आयी है । तुरंगा के मध्यम वर्गीय किसान नरेन्द्र नायक के 14 माह के मासूम छयांक को इस बीमारी ने जकड़ रखा है।

नरेन्द्र का छोटा बेटा छयांक जब छह महीने का था तब उसके कमर के नीचे के हिस्से ने मूवमेंट करना बंद कर दिया । इसके बाद धीरे – धीरे गर्दन का मूवमेंट भी कम होने लगा । इस पर परेशान माता – पिता ने राजधानी रायपुर के डाक्टरों से छयांक का जब चेकअप कराया तो डाक्टरों ने मासूम को एसएमए टाइप वन होने की शका जाहिर की और उन्हें दिल्ली में जाच कराने की सलाह दी । इसके बाद रायपुर के ही एकता हॉस्पीटल से छयांक की रिपोर्ट दिल्ली गंगाराम हास्पीटल भेजी गई तो जहां पीडियाट्रिक न्यूरोलाजिस्ट ने मासूम को एसएमए टाइप वन होने की पुष्टि की । एसएमए टाइप वन ऐसी दुर्लभ बीमारी है जो दस लाख बच्चों में से किसी एक को होती है । दवाइयां नहीं होने की वजह से इसका इलाज भी भारत में संभव नहीं है । अमेरिका में इसके इलाज के साथ दवाइयां हैं जिसे मंगाने से छयांक को जिंदगी मिल सकती है लेकिन इन दवाइयों की कीमत ही तकरीबन 16 करोड़ है । विदेश से लाने पर करीब 6.5 करोड़ का टैक्स भी लगेगा ।

नरेन्द्र नायक जैसे गरीब किसान के लिए करीब 22.50 करोड़ का इजेक्शन अपने दम पर मंगा पाना संभव नहीं है । एनजीओ के जरिये कर रहे क्राउड फंडिंग अपने मासूम के इलाज के बारे में पता चलने के बाद पहले तो पिता नरेन्द्र ने आसपास के लोगों से मदद मांगनी शुरु की और अब भिलाई के इंपेक्ट गुरु और मिलाप जैसी संस्थाओं के जरिए वे क्राउड फडिंग की कोशिश कर रहे हैं । हालांकि अब तक सिर्फ छयांक के इलाज के लिए 96 हजार की फडिंग हो पाई है ।

“एसएमए का केस है, यह बहुत रेयर बीमारी है। ये मामला उनके संशन में आया है। मेडिकल कालेज में बच्चे की व्यवस्था की जा सकती है । शासन की ओर से हर संभव प्रयास किया जाएगा।”
-डॉ . एसएन केशरी सीएमएचओ रायगढ़

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