रायगढ़ 23 अप्रैल । प्रदेश में कोरोना पर लगाम लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा तरह-तरह के जतन किये जा रहे हैं। कोरोना संक्रमण की रफ्तार जिस गति से बढ़ रही है उसमें होम आइसोलेशन ने विभाग को काफी राहत प्रदान की है। राज्य सरकार द्वारा जारी किये गए आंकडों के मुताबिक राज्य में 6.05 लाख से अधिक  मामले आए हैं जिनमें से 3.60 लाख से अधिक लोग होम आइसोलशन से ठीक हो चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग की मानें तो कम लक्षण और लक्षण नहीं होने पर कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर होम आइसोलेशन सबसे बेहतर विकल्प है। होम आइसोलेशन हेतु निम्न सहायता 108 संजीवनी एंबुलेंस सेवा, 104 आरोग्य एवं परामर्श सेवा, 1099 मुक्तांजलि सेवा, ई-संजीवनी ओपीडी एप मौजूद है।

होम आइसोलेशन में पालन किये जाने वाले नियम स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार होम आइसोलेशन हेतु बताए गए सभी दिशा-निर्देशों का पालन  करना आवश्यक है। संपूर्ण अवधि में घर के पृथक हवादार शौचालय युक्त कमरा में रहना होगा। प्रतिदिन अपनी ऑक्सीजन सांद्रता एवं तापमान की रिपोर्ट प्रेषित करना चाहिए। कंट्रोल रूम/चिकित्सक से आने वाले टेलीफोन का उचित जवाब देना। संपूर्ण अविध के दौरान घर से बाहर नहीं निकालना चाहिए और अपने कमरे के शौचालय, कपड़े एवं बर्तन की प्रतिदिन नियमानुसार सफाई करेंगे। किसी भी प्रकार से खतरे की अवस्था होने पर अपने चिकित्सक/कंट्रोल रूम में सूचित करना होगा और  चिकित्सक के परामर्श अनुसार नियमित दवाई का सेवन करना होगा। सभी प्रकार के दस्तावेजों में सही जानकारी उपलब्ध करवाना और अपने परिजनों की कोविड जांच नियमानुसार करवाना जरूरी है। परिजनों को चिकित्सक द्वारा बताए गए आवश्यक प्रोफिलेक्सिस की दवाई का सेवन करवाना चाहिए। अपने घर में पूरे समय तक मास्क लगाकर रहना और  होम आइसोलेशन के दौरान दिशा-निर्देशों का पालन नहीं कर रहें हैं वह अपात्र होंगे।

होम आइसोलेशन हेतु प्रक्रिया
कोविड 19 से पॉजिटिव आने वाले मरीजों को उपलब्ध एप के माध्यम से या हार्ड कॉपी के माध्यम से कंट्रोल रूम से सहमति के पश्चात चिकित्सक की अनुमति के बाद होम आइसोलेशन की स्वीकृति दी जा सकेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले मरीज उस क्षेत्र के खंडचिकित्साधिकारी/चिकित्साधिकारी की अनुमति के पश्चात ही होम आइसोलेशन के लिए पात्र होंगे। प्रत्येक मरीज होम आइसोलेशन की पात्रता के संबध में एक शपथ पत्र ( अंडरटेकिंग) भरकर संबंधित अधिकारी को उपलब्ध कराएंगे। किसी भी आपातकालीन स्थिति में मरीज अपने निकटम कोविड अस्पताल में उपलब्ध एंबुलेंस या स्वंय के निजी वाहन से तत्काल पहुंचना होगा।

होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीज आवश्यक रूप से ये ना करें
घर के अंदर अन्य कमरों ने ना जाएं, घर में बिना मास्क के न रहें, अपने बर्तन एवं कपड़ों को स्वंय साफ करें, दवाईयों का सेवन बंद न करें, अपनी जांच की रिपोर्ट नियमित रूप से चिकित्सक/कंट्रोल रूम को आवश्यक रूप से अवगत करावें, किसी खतरे की आशंका नजरअंदाज न करें, निकटस्थ कोविड चिकित्सालय की पूरी जानकारी रखें, आपातकाल में उपयोग हेतु एंबुलेंस/निजी वाहन की जानकारी पूर्ण रूप से रखें, बिना चिकित्सकीय सलाह के किसी प्रकार की जांच या दवाई का सेवन न करें, किसी भी खतरे की आशंका में तत्काल चिकित्सक / कंट्रोल रूम को आवश्यक रूप से अवगत कराएं, अपना मोबाईल स्विच ऑफ न करें, अपनी जानकारी गलत न देवें, होम आइसोलेशन के दौरान घर से बाहर न निकलें।

होम आइसोलेशन के लिए पात्रता
कोविड 19 के धनात्मक ऐसे मरीज जो लक्षण रहित अथवा कम लक्षण के हो, मरीज के घर में पृथक से शौचालययुक्त हवादार कमरा उपलब्ध हो, मरीज की देखरेख हेतु 24 घंटे के लिए एक परिचारक/परिजन उपलब्ध हो, मरीज समस्त शासकीय दिशा-निर्देशों की पालन करने की लिखित सहमति दे, मरीज चिकित्सक के बताए अनुसार नियमति रूप से दवाओं का सेवन करें, मरीज अपने समस्त पैरामीटर की जानकारी प्रतिदिन कम-से-कम दो बार कंट्रोल रूम को प्रेषित करेंगे, को-मॉर्बिट मरीज/अधिक उम्र के मरीज प्रतिदिन कम-से-कम एक बार वीडियो कॉलिंग की सहमित दें, मरीज घर में पूरे समय मास्क लगाकार रहेंगे तथा साफ-सफाई के सभी निर्देशों का पालन करेंगे, मरीज के परिजन परामर्श अनुसार नियमित रूप से बचाव हेतु अपनी दवाओं का सेवन करेंगे। मरीज अपने घर/ कमरे से पूरे 17 दिन तक बाहर नहीं निकलेंगे।

होम आइसोलेशन के लिए अपात्र के मरीजों की जानकारी
अत्यधिक उंम्र के व्यक्ति एवं एमीनो कॉम्प्रोमाइज व्यक्ति (एआईवी पॉजिटिव) अंगदान के मरीज, कैंसर के उपचारत मरीज आदि, ऐसे मरीज जो गंभीर किडनी की बीमारी से ग्रसित हों, जिनका डायलिसिस निरंतर चल रहा हो या सीरम क्रियेटिनी 2 से ज्यादा हो या जो गंभीर स्वास्थ्य की स्थिति में हों वे अपात्र होंगे, सांस की परेशानी के  मरीज  तथा जो विगत 3 माह के अंदर सांस या ह्रदय संबंधी रोगों के लिए भर्ती हों वे भी अपात्र होंगे। जिन मरीजों के पास स्मार्ट फोन उपलब्ध न हो, जिन मरीजों को स्मार्ट फोन चलाना न आता हो, ऐसे मरीज जो पहुंचविहीन क्षेत्रों में रहते हों, ऐसे स्थानों के मरीज जहां मोबाईल नेटवर्क उपलब्ध न हों, जिनके घर में पृथक से शौचालययुक्त कमरा न हों, एकल निवास करने वाला व्यक्ति।

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