रायगढ़ |  कलेक्टर भीम सिंह की पहल पर रागी के पोषक गुणों से जिले में बच्चों, गर्भवती व एनीमिक महिलाओं की सेहत संवारने की दिशा में रागी की प्रोसेसिंग कर लड्डू तथा अन्य पोषक उत्पाद तैयार किये जाने संबंधी योजना जल्द मूर्त रूप लेने जा रही है। इसके लिये रागी की क्लीनिंग और प्रोसेसिंग यूनिट की मशीन आ चुकी है। इसका इस्टालेशन चल रहा है जो अगले 2-4 दिनों में पूरा कर लिया जाएगा। इसके पश्चात इस प्रोजेक्ट में शामिल महिला समूहों व मैन पॉवर की टे्रनिंग होगी। इसके बाद रागी के लड्डू मिक्स पाउडर तैयार कर उसे आंगनबाड़ी में सप्लाई करने का काम शुरू कर दिया जाएगा। जहां से इस मिक्स के लड्डू बनाकर बच्चों को दिए जायेंगे।

कलेक्टर श्री सिंह ने तैयारियों की समीक्षा के लिये एक महत्वपूर्ण बैठक आज कलेक्टोरेट में ली। जिसमें इस प्रोजेक्ट के विभिन्न पहलुओं पर सभी संबंधित विभागों से चर्चा की गई। जिसके तहत किसानों से रागी की खरीदी, उसका स्टोरेज, प्रोसेसिंग व तैयार प्रोडक्ट के आंगनबाड़ी केन्द्रों तक ट्रांसपोर्टेशन की व्यवस्था के संबंध में चर्चा कर कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया गया। प्रोजेक्ट के अंतर्गत किसानों द्वारा उत्पादित रागी की खरीदी के लिए कृषि और महिला बाल विकास विभाग के एमओयू किया जाएगा। महिला समूहों को इसमें जोड़ा जा रहा है, जिससे उनके लिये अतिरिक्त आय अर्जन का मौका सृजित होगा। बैठक में सीईओ जिला पंचायत डॉ.रवि मित्तल, आकांक्षी जिलों के लिए राज्य कार्यक्रम अधिकारी नीरजा कुद्रीमोती, डीपीओ महिला बाल विकास टी.के.जाटवर, उप संचालक कृषि एल.एम.भगत सहित संबंधित विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

तीन चरणों में होगा काम
रागी के लड्डू तैयार करने में तीन चरणों में काम होगा। जिला मुख्यालय स्तर पर स्थापित क्लिनिंग व प्रोसेसिंग यूनिट में रागी की छिलाई व सफाई होगी। दूसरे चरण में रागी से लड्डू मिक्स पाउडर तैयार किया जाएगा। जिसे आंगनबाड़ी केन्द्रों में सप्लाई किया जाएगा। तीसरे चरण में आंगनबाड़ी केन्द्रों में कार्यकर्ताओं द्वारा तैयार मिक्स से लड्डू तैयार किया जाएगा। सभी चरणों में संलग्न महिला समूहों और मैन पावर की टे्रनिंग करायी जाएगी। इस प्रोजेक्ट में महिला बाल विकास के साथ कृषि विभाग व बिहान की महिला समूहों की सक्रिय भूमिका होगी।

रागी में होता है दूध से तीन गुना ज्यादा कैल्शियम
हड्डियों को मजबूती के लिये जरूरी कैल्शियम रागी में चावल से 30 गुना तथा दूध से तीन गुना अधिक पाया जाता है। यह बढ़ते बच्चों व महिलाओं के लिये अत्यंत आवश्यक पोषक तत्व है। आंगनबाड़ी केन्द्रों में यह लड्डू सप्ताह में दो दिन सुबह के नाश्ते के रूप में दिया जायेगा। शुरूआत में इसे जिले के पांच आदिवासी विकासखण्डों लैलूंगा, धरमजयगढ़, घरघोड़ा, खरसिया एवं तमनार में प्रारंभ किया जायेगा।

रॉ-मटेरियल से लेकर फायनल प्रोडक्ट तक सब जिले में होगा तैयार
इस शुरुआत से एक ओर जहां बच्चों की सेहत को संवारा जाएगा। वहीं दूसरी ओर रोजगार के मौके भी बढ़ेंगे। इस कार्यक्रम में रॉ-मटेरियल से लेकर फायनल प्रोडक्ट तक सब जिले में ही तैयार किया जायेगा। लड्डू और अन्य उत्पाद तैयार करने के लिए रागी का उत्पादन जिले के किसानों के द्वारा हो रहा है। जिसे महिला बाल विकास विभाग द्वारा खरीदा जाएगा। इसके अलावा रागी के प्रोसेसिंग और उससे लड्डू व उत्पाद, पैकिंग मटेरियल तैयार करने का काम स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा किया जाएगा, जिससे उनके लिए भी आय अर्जन का मौका सृजित होगा।

रागी फसल का उत्पादन देखने पहुंचे कलेक्टर
कलेक्टर श्री सिंह ने आज रागी के क्लिनिंग व प्रोसेसिंग के लिये इस्टाल किये मशीन का भी निरीक्षण किया। यहां उन्होंने मशीन की कार्यप्रणाली व काम करने वाली महिला समूह से चर्चा कर उनके कार्यों की जानकारी ली। इसी प्रकार कलेक्टर श्री सिंह ने ग्राम-कुर्मापाली में रागी के खेती का भी जायजा लिया। उन्होंने यहां के कृषक रमाकांत पटेल द्वारा दो एकड़ में ली जा रही रागी की फसल देखा और फसल उत्पादन के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि रागी न केवल पौष्टिक गुणों से भरपूर है बल्कि इसकी खेती से भी दूसरी फसलों के मुकाबले किसान ज्यादा मुनाफा कमा सकते है।

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